सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में कथित अवैध मस्जिद पर बड़ी कार्रवाई, ध्वस्तीकरण के आदेश; 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में कथित अवैध मस्जिद पर बड़ी कार्रवाई, ध्वस्तीकरण के आदेश; 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना

सहारनपुर : सहारनपुर जिला मुख्यालय परिसर में स्थित एक कथित अवैध मस्जिद को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए हैं। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने करीब डेढ़ वर्ष तक चली सुनवाई के बाद सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा मानते हुए मस्जिद को हटाने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित पक्ष पर लगभग 6 करोड़ 41 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले के बाद पूरे जिले में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

इस मामले की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी द्वारा की गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिलाधिकारी कार्यालय परिसर जैसी संवेदनशील सरकारी भूमि पर बिना वैध अनुमति के मस्जिद का निर्माण किया गया है। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि परिसर का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं बल्कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भी किया जा रहा था।

शिकायत के अनुसार मस्जिद परिसर में कुछ कमरों को बाहरी लोगों को किराए पर दिया गया था, जिनका किराया मस्जिद कमेटी द्वारा वसूला जा रहा था। साथ ही परिसर में डाकघर भी संचालित होने की बात कही गई। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और इसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट में इस मामले की करीब डेढ़ वर्ष तक सुनवाई चली। दोनों पक्षों को अपने-अपने साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। शासकीय अधिवक्ता विनय चौहान के अनुसार मस्जिद पक्ष की ओर से बिजली बिल और नगर पालिका का असेसमेंट रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया, लेकिन भूमि के स्वामित्व से जुड़े कोई वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री या मालिकाना हक के प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। वहीं प्रशासन की ओर से राजस्व अभिलेख, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज न्यायालय के समक्ष रखे गए। मजिस्ट्रेटी जांच में पाया गया कि कलेक्ट्रेट परिसर की 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर बना निर्माण वैध अभिलेखों के अभाव में अवैध श्रेणी में आता है।

सुनवाई पूरी होने के बाद नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और उसके उपयोग को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्ष पर लगभग 6 करोड़ 41 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया। कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने मौके पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने दावा किया कि यह मस्जिद वर्ष 1951 से परिसर में मौजूद बताई जाती रही है। उनका आरोप है कि मस्जिद परिसर में बने कमरों को किराए पर देकर आर्थिक लाभ लिया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान जब जिला मुख्यालय परिसर को सुरक्षा कारणों से सील किया जाता था, तब नमाज के बहाने बड़ी संख्या में बाहरी लोगों का प्रवेश होता था। उनके अनुसार इससे प्रशासनिक और चुनावी गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती थी। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी करने और जुर्माने की राशि बढ़ाने की भी मांग की है।

नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और उसके दुरुपयोग के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और कानून का पालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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